क्या है स्थायी सिंधु आयोग
Sindhu Water Treaty 1960 ,
(India And Pakistan)
आयोग के बारे मे -
- यह भारत ओर पाकिस्तान के अधिकारियों का एक द्विपक्षीय आयोग है जीसी सिंधु जल संधि 1960 ,के कार्यान्वयन ओर लक्षों को प्राप्त करने हेतु बनाया गया है
- सिंधु जल संधि के अनुसार ,आयोग वर्ष मे कम से कम एक बार नियमित तौर पर भारत ओर पाकिस्तान मे बैठक होगी
आयोग के कार्य -
- नदी के जल के विकास से संबंधित दोनों देशों की सरकारों की किसी भी समस्या का अध्ययन करना और रिपोर्ट देना
- जल बटवारे को लेकर उत्पन्न विवादों का समाधान निकालना
- प्रत्येक पाँच वर्षों मे एक बार नदियों का निरीक्षण करने हेतु एक सामान्य दौरा करना है
- संधि के प्रावधानों के कार्यान्वयन हेतु आवश्यक कदम उठान भी शामिल है
PIC की 115 वी बैठक का आयोजन 2018 मे लाहोर मे किया गया था
सिंधु जल संधि 1960 -
19 सितंबर 1960 मे विश्व बैंक की मध्यस्था मे तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान द्वारा इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए और इस संधि मे सिंधु और उसकी सहायक नदियों उपयोग दोनों देशों मे किस प्रकार किया जाना है इस बात का निर्धारण किया गया
संधि के अनुसार पूर्वी नदिया ( रावी, बियास, सतलज ) का जल भारत के लिए और पश्चिमी नदियों का ( सिंधु, चिनाब ,झेलम ) जल पाकिस्तान के लिए निर्धारित किया गया
संधि के तहत पनबिजली उत्पादन का अधिकार भी दिया गया है इनके डिजाइन और संचालन हेतु भारत को विशिष्ट मानदंडों का पालन करना आवश्यक है
यह पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों पर भारतीय पनबिजली परियोजनाओ के डिजाइन और संचालन को लेकर चिंता व्यक्त करने का अधिकार भी देता है
यह संधि विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से हाल करने हेतु एक मध्यस्थता तंत्र भी प्रधान करती है
बाधाओ को लेकर भारत और पाकिस्तान के मध्य मतभेद रहे है उदाहरण के तौर पर वर्ष 2010 मे पाकिस्तान द्वारा सिंधु जल संधि एक छोटी सहायक नदी किशनगंगा (पाकिस्तान मे नीलम के रूप मे जाना जाता है ) पर स्थित भारत की 330 मेगावाट जल -विद्युत परियोजना को लेकर आंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कार्यवाही शुरू की गई थी
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